Tuesday, September 20, 2016

"क़ैद"

तुम बिन तन्हाई की 
कोठरी में क़ैद हूँ 
तुम आओ 
मुझे आज़ाद कर दो। 
 ( डॉ. चंचल भसीन )

Friday, September 16, 2016

ख़ामोशी- डॉ. चंचल भसीन

आओ, 

आज इस ख़ामोशी को 

तोड़कर 

उस मोहब्बत-ए-जां में 

चलें

यहाँ बातें तुम करो

मैं सुनूँ, 

और

कुछ बातें मैं करूँ 

और 

तुम सुनो!

शब्दों के गूढ़ार्थों को

समझे,

उसमें समाएँ,

न हो गिला किसी बात का

फ़ुरसत के लम्हों को 

सँवारे,

बे दखल होकर!

आत्माओं को तृप्त करें 

न रहे कोई तृष्णा 

पुर्नजन्म की!

(डॉ. चंचल भसीन)